Kerala Politics: केरलम में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत और अब राज्य के नए मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साध ली है. अब यही चुप्पी प्रदेश में नए 'सियासी खेला' की संभावनाओं को बल दे रही है. कांग्रेस ने केसी वेणुगोपाल जैसे कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर वीडी सतीशन को सीएम बनाने का ऐलान किया है.
कांग्रेस के इस फैसले के बाद से वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं. उनके करीबी भी इस घटनाक्रम पर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं. उनके आवास पर भी असामान्य सन्नाटा देखा जा रहा है. यही चुप्पी आने वाले दिनों में किसी बड़े सियासी घटनाक्रम की संभावनाओं को भी हवा दे रही है.
दरअसल, लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में मजबूत पकड़ के चलते चेन्निथला को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. चेन्निथला का राजनीतिक सफर लंबा और संघर्ष भरा रहा है. उन्होंने हमेशा पार्टी की एकता और अनुशासन को प्राथमिकता दी. चेन्निथला लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामों में लगे हुए थे. करुणाकरन के मंत्रिमंडल में महज 27 साल की उम्र में मंत्री बनकर उन्होंने साबित कर दिया था कि वो संगठन के सच्चे सिपाही हैं.
केरलम में कांग्रेस की जीत के बाद चेन्निथला को लग रहा था कि उनकी सीनियरिटी और अनुभव आखिरकार काम आएगा. अब नए सीएम की घोषणा के बाद न केवल 70 साल की उम्र में क्लिफ हाउस पहुंचने की रमेश चेन्निथला की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचा है, बल्कि उनकी संजोयी उम्मीदें आज पूरी तरह से टूट गई.
हालांकि केरलम की सीएम पद की रेस में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम भी शामिल था लेकिन कांग्रेस किसी तरह से उनकी नाराजगी को संभालने में कामयाब हो पायी है। मीडिया को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि 'पार्टी ने एक निर्णय लिया और एक सच्चे कांग्रेसी के रूप में हम सभी पार्टी के इस निर्णय के साथ हैं। पार्टी का फैसला ही मेरा फैसला है। मैं कांग्रेस पार्टी का एक वफादार सिपाही हूं और जमीन पर हाईकमान के आदेश का पालन किया जाएगा'
वहीं नए सीएम के ऐलान के तुरंत बाद चेन्निथला अपने गृह जिले अलप्पुझा के हरिपाद की ओर रवाना हो चुके हैं. उन्होंने मीडिया एवं पार्टी नेताओं से भी पूरी तरह से दूरी बना रखी है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में चेन्निथला की भूमिका क्या होगी. क्या वे पार्टी संगठन में सक्रिय बने रहेंगे या फिर उनकी नाराजगी किसी बड़े राजनीतिक संकेत में बदल सकती है? फिलहाल उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है. राजनीतिक गलियारों में इसे ‘तूफान से पहले की शांति’ के तौर पर भी देखा जा रहा है.












